वर्तमान का अनुभव लेने के लिए अतीत को त्याग दें!
क्या यह आश्चर्यचकित नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने सुनहरे बचपन, सुनहरी किशोरावस्था या सुनहरे हनीमून की स्मृतियां होती हैं, किन्तु कोई भी व्यक्ति अपने वर्तमान के ‘सुनहरा’ होने का अनुभव नहीं करता है।
वर्तमान हमेशा एक बोझ और नीरस होता है! हम अतीत में इतने जकड़े हुए होते हैं कि हम वर्तमान तक को भी जीते हैं, हम कभी भी इसका पूरी तरह से आनंद नहीं ले पाते हैं। अतीत के पीछे भागने या फिर भविष्य के बारे में विचार करने के कारण हम वर्तमान को गंवा देते हैं। आध्यात्मिकता अतीत को त्यागने और वर्तमान में जीने के बारे में है। अभी आप अतीत का संग्रह कर रहे हैं। इसकी वजह से आप दलदल में फंसा हुआ महसूस करते हैं। आप नहीं जानते कि अपने अतीत से भारमुक्त कैसे हों। आपको ऐसा महसूस होता है कि आपको अतीत के बोझ को अपने साथ ढोना है। क्योंकि समाज ने आपको इसे जीवनपर्यन्त ढोना सिखलाया है। यदि आप इसे त्यागने का प्रयास करते हैं, तो आपको अपराधबोध होता है। समाज आपसे कहता है कि यदि आप अतीत को त्यागते हैं, तो आप अकृतज्ञ हो जायेंगे। अपने अतीत को अपने साथ ढोने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। वे लोग जो आपको ये बातें बताते हैं, वे यह नहीं जानते कि कृतज्ञता ऐसा कुछ है जिसे आपको अस्तित्व और समग्रतौर से सभी की ओर अपने भीतर निरंतर महसूस करना होता है। यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे आप अपने जीवन में छुटपुट घटनाओं की ओर महसूस करते हैं।
जब आप अतीत को त्याग देंगे, तो वर्तमान आपको आश्चर्य प्रदान करेगा। समाज आपको सदा वर्तमान का अतीत के रूप में आनंद लेने की शिक्षा देता है। यह आपको हर चीज को अतीत बनाने और फिर इसका आनंद लेने की शिक्षा देता है। मैंने लोगों को देखा है जोकि छुट्टी मनाने जाते हैं तो उनके पास हमेशा स्टिल कैमरा और वीडियो कैमरा होता है। यहां तक कि अत्यंत दर्शनीय स्थलों पर भी, वे अपने आस-पास प्रकृति का आनंद लेने की अपेक्षा, उन दर्शनीय स्थलों को अपने कैमरे में कैद करते दिखलाई पड़ते हैं। और फिर वे घर चले जाते हैं, और अपने घर की चार दीवारी के भीतर एक सोफे पर बैठ जाते हैं और अपने कैमरे के माध्यम से उसी दर्शनीय स्थल को देखते हैं! वे अपने परिवार और दोस्तों को सभी फोटो दिखलाते हैं और बताते हैं कि फोटो ंमें दिखलाए गए इन स्थलों का हमने भ्रमण किया है। दुर्भाग्यवश वे उस स्थल का तब आनंद नहीं लेते जब वे वहां थे!
आप वर्तमान का आनंद तभी लेते हैं जब वे अतीत बन जाता है। यही कारण है कि लोग कहते हैं, ‘कितने सुनहरे दिन थे।’ जब ऐसे दिन असल में थे तो निश्चय ही आपने विचार नहीं किया था कि इतने सुनहरे दिन हैं। उस समय आप यह कह रहे थे कि पिछले दिन कितने सुनहरे थे। जब आप वर्तमान में होते हैं तो प्रत्येक पल एक उत्सव बन जाता है और आनंद लेने के लिए आप किसी अतीत की घटना की खोज नहीं करते हैं। चिंताओं के लिए अतीत का चीर-फाड़ करना समय की बर्बादी है क्योंकि आप हर पल एक नए व्यक्ति हैं। हर पल आप विकसित हो रहे हैं एवं नवीनतम हो रहे हैं। आप अस्तित्व का एक भाग हैं और अस्तित्व हर पल बदलता रहता है। तब आप अपने नवीनतम ज्ञान से अतीत की घटनाओं का चीर-फाड़ कैसे कर सकते हैं? यह पूर्णतया असम्बद्ध और अर्थहीन है। नवीनतम ज्ञान से कभी भी अतीत का आकलन न करें। ऐसा करना बिल्कुल मूर्खतापूर्ण है। इससे तो और ज्यादा चिंता और अपराध बोध का जन्म होता है। हर पल आप मर रहे हैं और एक नया व्यक्ति बन रहे हैं। यह सत्य है। तो आओ चलो अतीत को त्याग दें और हर पल अतीत से मुक्त नवीन जीवन जिएं!
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