अपने रिश्तों का आनंद लीजिए
क्या आपने अपने रिश्तों पर ईमानदारी से नज़र डाली है?
प्रत्येक रिश्ते में, हम निरंतर दूसरे व्यक्ति की वही मूर्ति बनाते हैं ,जिसकी हम उससे कल्पना करते हैं। और इस बात की जानकारी हुए बिना, हम निरंतर दूसरों को नियंत्रित करने, उन्हें बदलने और उन पर अधिकार प्राप्त करने का प्रयास करते रहते हैं।
एक सजीव व्यक्ति पर अधिकार प्राप्त करना अंततः उसके प्रति अपने अनादर को दिखाना है! इसका अर्थ यह है कि हम उस व्यक्ति को सम्पत्ति में परिवर्तित कर रहे हैं। हम ऊर्जा को पदार्थ में परिवर्तित कर नष्ट कर रहे हैं।
हम अपने मस्तिष्क में एक आदर्श व्यक्ति की छवि बनाकर रखते हैं, और दूसरे व्यक्ति को उसी छवि में ढालने का प्रयास करते रहते हैं! यदि हम अपने भीतर की उस छवि का त्याग कर दें, तो हम रिश्तों का आनंद लेने के लिए अनंत संभावनाओं को प्राप्त कर लेंगे।
जबतक आपकी कल्पनाएं हैं, आप कभी भी एक वास्तविक रिश्ते को घटित नहीं होने दे सकते। चाहें आप दूसरे व्यक्ति के साथ एक ही कमरे में चैबीसों घण्टे ही क्यों न व्यतीत कर रहे हों, आप उसकी आंखों में नहीं देखते हैं! क्योंकि आप तो कल्पना में जीते हैं न कि वास्तविकता में। दरअसल आप वास्तविक व्यक्ति के साथ तो रह ही नहीं रहे होते हैं।
तो जिस दिन से आप कल्पनाओं को त्यागना सीख जायेंगे, उसी दिन से आपकों वास्तविक रिश्तों का अनुभव होना शुरू हो जायेगा!
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