मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

प्रेम का स्रोत बन जाएं

प्रेम का स्रोत बन जाएं
वास्तविक प्रेम कुछ ऐसा है जोकि इतना गहन एवं ऊर्जामय होता है कि आप इसे तबतक नहीं जान पायेंगे जबतक कि आप इसका अनुभव नहीं करेंगे। प्रेम ऊर्जा की वह अभिव्यक्ति है जिसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता। मुझे एक बात बताइए कि क्या आप किसी व्यक्ति से पहली बार मिलते हैं, तो क्या आप उससे प्रेम करते हैं? जब मैं यह प्रश्न पूछता हूं, तो लोग अक्सर मुझे बताते हैं - जबकि हम किसी व्यक्ति को जानते तक नहीं, तो भला हम उससे प्रेम कैसे कर सकते हैं?
ठीक, यही आप सोचते हैं। चलिए मैं आपको थोड़ा बहुत बौद्धिक समझ और ध्यान के बारे में बताता हूं, आप जान पाओगे कि आप बिना किसी कारण के किसी से प्रेम कर सकते हैं! आप सड़क के किनारे के वृक्ष को प्रेम कर सकते हैं। आप उनकी देखभाल कर सकते हैं खुद से प्रवाहित होने वाली ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं। आप सड़क पर गुजरने वाले व्यक्ति से प्रेम कर सकते हैं और आपको उस व्यक्ति को जानने की भी जरूरत नहीं है। प्रेम वास्तव में आपका अस्तित्व है, न कि द्रवशोधन की गुणवत्ता जोकि आप धारण करते हैं। आज किसी भी चीज को इतन गलत नहीं समझा जा रहा है जितना कि प्रेम को। आज प्रेम लेन-देन बन गया है। यदि कोई आपके बारे में अच्छा कहता है, तभी आप उसे प्रेम करते हैं। कल यदि वही व्यक्ति आपकी बुराई करता है, तो आप उसे प्रेम नहीं करते और संभवतः उससे घृणा करना शुरू कर देते हैं।
यहां तक कि आपके लम्बे समय के दोस्त, जिनसे आप प्रतिदिन इंटनेट पर चैटिंग करते हैं, अचानक आपको इतने घनिष्ठ नहीं दिखलाई पड़ेंगे, यदि वह ऐसा कुछ कह देते हैं, जोकि आपके अनुमोदन के विरूद्ध हो जाता है। इस समय आपका प्रेम कहां होता है? अर्थात् यह अस्थाई था! यह तो आप एक गेम खेल रहे हैं, एक ऐसा गेम जिसमें प्रेम और घृणा आते जाते रहते हैं और समयानुसार परिवर्तित होते रहते हैं। और यह प्रेम-घृणा के रिश्ते बिल्कुल भी प्रेम नहीं हैं। स्पष्ट जान लीजिए। यह तो किसी व्यक्ति या स्थिति के प्रति कोई प्रतिक्रिया जैसा है, बस। इसी को हम प्रेम कहते हैं। यह वास्तविक प्रेम नहीं है। यह तो व्यक्तिगत निष्ठा पर आधारित प्रेम हुआ।
वास्तविक प्रेम में कोई नापसंद वाली चीज नहीं होती। वास्तविक प्रेम का कोई उद्देश्य नहीं होता। वास्तविक प्रेम स्वतः आश्रित होता है। यह किसी पराधीनता को नहीं जानता। आप खुद नियंत्रित है तो यही प्रेम है। जो कोई भी व्यक्ति अथवा वस्तु इसके सम्पर्क में आती है, उसे इसका अनुभव होता है। जैसे कि नदी स्वाभाविकरूप से प्रवाहित होती है, और विभिन्न स्थलों पर लोग इसका आनंद लेते हैं। वास्तविक प्रेम व्यक्ति से प्रवाहित होता है और उसके आस-पास मौजूद लोग इसका अनुभव लेने में समर्थ होते हैं। वास्तविक प्रेम में पूर्णतया कोई शर्त नहीं होती। वास्तविक प्रेम शर्तविहीन होता है। वास्तविक प्रेम की स्थिति में आपके भीतर की ऊर्जा अतिप्रवाहित होती है और इसे प्रेम के रूप में अभिव्यक्त करती है। और इस अवस्था में पहुंचने पर, आप अपने रिश्तों की कठिन से कठिन गांठ को खोलने में समर्थ होते हैं, और प्रेममय होकर स्वयं को सुंदरता से अभिव्यक्त कर पाने में संभव होते हैं।
अपने अस्तित्व की गुणवत्ता अर्थात् पे्रम, को खोजने के लिए, आप दो काम कर सकते हैं। पहला काम तो यह है कि इस तरह के शब्दांे को बारम्बार सुनें जिससे कि वास्तविक प्रेम के बारे में आपके भीतर चेतना का सृजन हो सके। इस प्रकार रूपांतर की प्रक्रिया हेतु आपके भीतर एक खाली स्थल का सृजन होगा। दूसरा काम आपको ध्यान करना है जिससे कि दरअसल रूपांतर घटित हो सके। इस बात पर खास ध्यान दीजिए। जब आप बिना किसी कारण के प्रेम करने में समर्थ हो जाते हैं, तो आपका किसी भी तरह विस्तार होना शुरू हो जाता है। तब आपका संसार एक जीवन की अपेक्षा अधिक विशाल हो जाता है। कितनी आनंदमय स्थिति होती है! आप खुद के और दूसरों के लिए ऊर्जा स्रोत बन जाते हैं। आप इतने अधिक प्रवाहित होने लगते हैं कि आपके भीतर की ऊर्जा दूसरों को छूने लगती है। कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। दूसरों स्वतः ही आपकी ओर खिचे चले आते हैं।

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